शिक्षक दिवस: फर्रुखाबाद में शिक्षा की मशाल जलाते समर्पित शिक्षक
शिक्षक दिवस पर फर्रुखाबाद के राजेपुर ब्लॉक के उन शिक्षकों की कहानी, जिन्होंने बाढ़ जैसी आपदा में भी बच्चों का भविष्य संवारने का संकल्प जारी रखा।
शिक्षक दिवस के अवसर पर उन शिक्षकों के अतुलनीय योगदान को याद करना अत्यंत आवश्यक है, जो विपरीत परिस्थितियों में भी शिक्षा की अलख जगाए हुए हैं। फर्रुखाबाद जनपद में बाढ़ की गंभीर चुनौती के बीच भी शिक्षकों ने अपने दायित्वों का निर्वहन करते हुए प्रभावित क्षेत्रों में शैक्षणिक कार्य को बाधित नहीं होने दिया। विकासखंड राजेपुर में शिक्षकों के इस समर्पण की खंड शिक्षा अधिकारी राजीव श्रीवास्तव ने विशेष रूप से सराहना की है।
खंड शिक्षा अधिकारी राजीव श्रीवास्तव ने शिक्षकों को संबोधित करते हुए कहा कि एक शिक्षक का पद अत्यंत गरिमामयी होता है। उन्होंने शिक्षकों से आह्वान किया कि वे अपनी मेहनत, अनुभव और निष्ठा से देश की भावी पीढ़ी का भविष्य उज्ज्वल करें। उन्होंने बताया कि राजेपुर के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों जैसे तीसराम की मढ़ैया, कुतलूपुर, किराचन और कुड़री सारंगपुर में विषम परिस्थितियों के बावजूद विद्यालयों का संचालन सुनिश्चित किया गया। चित्रकूट विद्यालय के बच्चों की पढ़ाई तो बाढ़ राहत शिविरों में भी जारी रखी गई, जो शिक्षकों की कर्तव्यनिष्ठा का प्रमाण है।
कुसमापुर विद्यालय की अनूठी कार्यशैली
विकासखंड राजेपुर का कुसमापुर प्राथमिक विद्यालय आज अपनी आधुनिक व्यवस्थाओं और शैक्षणिक वातावरण के लिए पूरे जनपद में एक मिसाल बन चुका है। विद्यालय में स्मार्ट क्लास, शुद्ध पेयजल के लिए आरओ, इनवर्टर की सुविधा और रंगीन परिसर बच्चों को आकर्षित करता है। इस विद्यालय का उद्घाटन वर्ष 2021 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा किया गया था और इसे जनपद में फाइव स्टार रेटिंग भी प्राप्त है। इंचार्ज प्रधानाध्यापक शिवम दीक्षित के नेतृत्व में यहाँ शिक्षा के साथ-साथ संस्कार और अनुशासन पर विशेष ध्यान दिया जाता है, जिसके लिए परिसर में मां सरस्वती का मंदिर भी स्थापित किया गया है।
कड़हर विद्यालय: निरंतर सुधार की यात्रा
इसी प्रकार, ग्राम कड़हर स्थित प्राथमिक विद्यालय में इंचार्ज प्रधानाध्यापक आकाश सिंह राठौर और उनकी समर्पित टीम ने शिक्षा की तस्वीर बदली है। 5 सितंबर 2018 को जब आकाश सिंह ने यहाँ कार्यभार संभाला था, तब विद्यालय में बमुश्किल 15-20 बच्चे आते थे। आज यहाँ 111 बच्चे नामांकित हैं और उपस्थिति का स्तर भी बहुत सराहनीय है।
विद्यालय की प्रमुख विशेषताएं:
- पाठ्यक्रम आधारित गुणवत्तापूर्ण शिक्षण।
- अभिभावकों के साथ निरंतर संवाद और सहयोग।
- नैतिक शिक्षा और संस्कार युक्त वातावरण।
- शिक्षकों और शिक्षामित्रों की सक्रिय भागीदारी।
प्रधानाध्यापक आकाश सिंह राठौर का कहना है कि वे 5 सितंबर 2026 तक अपने आठ वर्ष के कार्यकाल को पूर्ण करेंगे। उन्होंने अभिभावकों से अपील की है कि बच्चों को प्रतिदिन विद्यालय भेजें, क्योंकि नियमित उपस्थिति ही शिक्षा की गुणवत्ता का आधार है।
मुख्यमंत्री द्वारा सराहना
फर्रुखाबाद की बाढ़ प्रभावित तहसीलों के दौरे के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वयं शिक्षकों के जज्बे को सलाम किया था। उन्होंने पुलिस लाइन सभागार में आयोजित कार्यक्रम में कहा था कि कठिन आपदा के समय भी शिक्षकों ने जिस तरह से शैक्षणिक व्यवस्था को निरंतर बनाए रखा, वह अनुकरणीय है।
शिक्षक दिवस पर राजेपुर के इन विद्यालयों की सफलता यह सिद्ध करती है कि शिक्षक केवल कक्षा में पढ़ाने तक सीमित नहीं हैं। वे समाज के निर्माता हैं जो हर चुनौती को पार कर बच्चों के बेहतर भविष्य का निर्माण कर रहे हैं। उनका समर्पण ही राष्ट्र निर्माण की असली नींव है।
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