मारहरा में सद्भावना: लोधी और मुस्लिम समाज ने की शांति की पहल
एटा के मारहरा में रानी अवंती बाई शोभा यात्रा के दौरान हुए विवाद के बाद दोनों समुदायों ने संयुक्त बैठक कर आपसी भाईचारे की मिसाल कायम की।
एटा जिले के मारहरा कस्बे में 30 अगस्त को रानी अवंती बाई लोधी की शोभा यात्रा के दौरान हुई अप्रिय घटनाओं ने स्थानीय जनजीवन में तनाव पैदा कर दिया था। शोभा यात्रा के दौरान कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा दूसरे समुदाय के प्रति किए गए अशोभनीय कृत्यों के कारण स्थिति तनावपूर्ण हो गई थी, जिसके चलते पुलिस को त्वरित कार्रवाई करते हुए कुछ गिरफ्तारियां भी करनी पड़ी थीं। हालांकि, इस तनाव को दूर करने और क्षेत्र में शांति बहाली के लिए दोनों समुदायों के प्रबुद्ध नागरिकों ने एक सराहनीय पहल की है।
मारहरा के सी.एम. जुबैरी पब्लिक स्कूल में मुस्लिम समाज और लोधी राजपूत समाज की एक महत्वपूर्ण संयुक्त बैठक आयोजित की गई। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य बीते दिनों हुई घटनाओं पर चर्चा करना और आपसी गिले-शिकवे दूर करना था। बैठक की शुरुआत में लोधी समाज के प्रतिनिधियों ने शोभा यात्रा के दौरान हुई घटना पर गहरा खेद व्यक्त किया और मुस्लिम समुदाय से खुले दिल से माफी मांगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि भविष्य में इस तरह की किसी भी घटना की पुनरावृत्ति नहीं होने दी जाएगी और समाज के लोग आपसी प्रेम को प्राथमिकता देंगे।
बैठक को संबोधित करते हुए पूर्व चेयरमैन परवेज़ जुबैरी ने मारहरा की ऐतिहासिक गंगा-जमुनी तहजीब का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि मारहरा हमेशा से भाईचारे के लिए जाना जाता है और इस सौहार्द को किसी भी कीमत पर कमजोर नहीं होने दिया जाएगा। शोभा यात्रा समिति के उपाध्यक्ष चमन प्रकाश ने असामाजिक तत्वों की कड़ी आलोचना की और इस कठिन समय में मुस्लिम समाज द्वारा दिखाए गए धैर्य और संयम की मुक्त कंठ से प्रशंसा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि कुछ चंद लोगों की करतूत पूरे समाज की विचारधारा नहीं हो सकती।
इस सुलह वार्ता का सबसे भावनात्मक पल तब आया जब जुलूस के दौरान हबीब खां की टोपी उतारे जाने की घटना पर कमेटी ने उनसे माफी मांगी। शोभा यात्रा समिति के सदस्यों ने हबीब खां को नई टोपी पहनाई और उन्हें हार पहनाकर अपनी गलती का अहसास कराया। इस गरिमापूर्ण व्यवहार के बाद हबीब खां ने कहा कि अब उन्हें कोई शिकायत नहीं है और वे पूरी तरह से इस सुलह प्रक्रिया से संतुष्ट हैं।
बैठक में अध्यापक महेंद्र सिंह लोधी, भूदेव लोधी, राशिद कुरैशी, चमन मियां, महेंद्र दिवाकर, अशफाक कुरैशी और धीरेन्द्र सिंह सहित अनेक लोगों ने अपने विचार रखे। सभी वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि क्षेत्र की शांति के लिए आपसी संवाद सबसे बड़ा हथियार है। इस आयोजन ने न केवल तनाव के माहौल को खत्म किया, बल्कि दोनों समुदायों के बीच एक नई मित्रता की आधारशिला भी रखी है।
इस अवसर पर हाजी अहसान, शिवम सभासद, खुशीराम, नुसूर खां, रामसिंह, भरत प्रधान, चांद मियां, शोहेब, रविंद्र सिंह, आसिफ सिद्दीकी, हाफिज नाज़िम, अमित वर्मा, रिंकू प्रधान, मानपाल, रंजीत सिंह, उवैस, मुफीद, जहीर वस्फी और मझले नुसूर सहित बड़ी संख्या में दोनों समाज के लोग उपस्थित रहे। खुशगवार माहौल में संपन्न हुई इस बैठक ने यह संदेश दिया कि मानवता और भाईचारा ही किसी भी समाज की सबसे बड़ी शक्ति है।
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