एटा: जिलाधिकारी एम. अरुन्मोली ने मेडिकल कॉलेज का किया औचक निरीक्षण
जिलाधिकारी एम. अरुन्मोली ने एटा के वीरांगना अवंतीबाई लोधी मेडिकल कॉलेज का औचक निरीक्षण कर स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और व्यवस्थाओं का जायजा लिया।
एटा के वीरांगना अवंतीबाई लोधी मेडिकल कॉलेज में स्वास्थ्य सेवाओं की जमीनी हकीकत परखने के उद्देश्य से जिलाधिकारी एम. अरुन्मोली ने औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने पंजीयन कक्ष से लेकर आईसीयू और रसोई तक की व्यवस्थाओं का बारीकी से जायजा लिया। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि मरीजों को शासन की गाइडलाइन के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिकता है और इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
निरीक्षण की शुरुआत पंजीयन कक्ष से हुई, जहाँ जिलाधिकारी ने आभा आधारित डिजिटल ओपीडी पंजीकरण को प्रभावी ढंग से लागू करने के निर्देश दिए। उन्होंने अल्ट्रासाउंड और पैथोलॉजी सेवाओं के संचालन पर असंतोष व्यक्त करते हुए कहा कि इन सेवाओं को सीटी स्कैन की भांति निर्धारित समय-सारिणी और मानकों के अनुसार ही चलाया जाए ताकि मरीजों को समय पर जांच रिपोर्ट मिल सके।
मरीजों के साथ संवेदनशील व्यवहार पर जोर
जिलाधिकारी ने विभिन्न वार्डों का दौरा कर भर्ती मरीजों और उनके तीमारदारों से सीधा संवाद किया। उन्होंने दवाओं की उपलब्धता, भोजन की गुणवत्ता और चिकित्सकों की नियमित विजिट के बारे में फीडबैक लिया। उन्होंने मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य और मुख्य चिकित्सा अधीक्षक को सख्त निर्देश दिए कि मरीजों को उपचार या जांच के लिए अनावश्यक रूप से भटकना न पड़े। इसके लिए संबंधित स्टाफ को उचित प्रशिक्षण और स्पष्ट जिम्मेदारी दी जानी चाहिए।
विशेष रूप से डायलिसिस यूनिट के निरीक्षण के दौरान उन्होंने भवन की स्थिति पर चिंता जताते हुए इसे नए भवन में स्थानांतरित करने की प्रक्रिया तेज करने के निर्देश दिए। उन्होंने कार्यदायी संस्था सीएंडडीएस को भवन की तकनीकी समस्याओं का तत्काल समाधान करने को कहा।
पारदर्शिता और मानवीय दृष्टिकोण
भोजन व्यवस्था की जांच करते हुए जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि निर्धारित मानकों के अनुसार स्वच्छता के साथ भोजन तैयार किया जाए और वितरण रजिस्टर का सही रखरखाव सुनिश्चित हो। उन्होंने इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर को मेडिको-लीगल मामलों में निष्पक्ष और तथ्यात्मक रिपोर्ट तैयार करने की हिदायत दी, ताकि किसी भी प्रकार के पक्षपात की गुंजाइश न रहे।
जिलाधिकारी ने सभी चिकित्सकों और पैरामेडिकल स्टाफ को मरीजों के साथ सहानुभूतिपूर्ण व्यवहार करने का परामर्श दिया। उन्होंने कहा कि अस्पताल आने वाला व्यक्ति और उसके परिजन पहले से ही कठिन दौर से गुजर रहे होते हैं, इसलिए उनके साथ आत्मीयता और मानवीय दृष्टिकोण अपनाना प्रत्येक कर्मचारी का कर्तव्य है।
- गुणवत्तापूर्ण उपचार: शासन की गाइडलाइन का शत-प्रतिशत पालन सुनिश्चित करें।
- स्वच्छता और हाइजीन: सभी वार्डों में साफ-सफाई के मानकों को प्राथमिकता दें।
- पारदर्शिता: जांच और दवाओं के वितरण में किसी भी प्रकार की अनियमितता न हो।
निरीक्षण के दौरान मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. बलवीर सिंह, अधीक्षक डॉ. सुरेश चंद्रा और डॉ. साधना सिंह सहित अन्य चिकित्सा अधिकारी उपस्थित रहे। प्रशासन की इस सक्रियता से मेडिकल कॉलेज की व्यवस्थाओं में सुधार की उम्मीद जगी है।
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