मैनपुरी पोक्सो कोर्ट का बड़ा फैसला: दुष्कर्मी को 20 साल की सजा
मैनपुरी की पोक्सो कोर्ट ने नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में बलराम नामक दोषी को 20 वर्ष के कठोर कारावास और 60 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है।
न्याय व्यवस्था में त्वरित और सख्त कार्रवाई का एक और उदाहरण मैनपुरी जिले से सामने आया है, जहाँ माननीय न्यायालय ASJ पोक्सो कोर्ट ने एक गंभीर मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए अपराधी को 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। यह मामला जनपद के थाना घिरोर क्षेत्र से संबंधित है, जिसने क्षेत्र में कानून के प्रति विश्वास को और अधिक सुदृढ़ किया है।
घटनाक्रम के अनुसार, 03 जुलाई 2020 को थाना घिरोर में एफआईआर संख्या 145/2020 दर्ज की गई थी। इस मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 363, 366, 376 और पोक्सो एक्ट की धारा 4(2) के तहत गंभीर आरोप पंजीकृत किए गए थे। अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों के अनुसार, अभियुक्त बलराम पुत्र सुरेन्द्र, जो ग्राम नंगला फूलसहाय, थाना बरनाहल का निवासी है, ने वादी की नाबालिग पुत्री को बहला-फुसलाकर अगवा कर लिया था। इसके बाद उसके साथ दुष्कर्म जैसी घिनौनी वारदात को अंजाम दिया गया।
न्यायिक प्रक्रिया और साक्ष्यों की भूमिका
इस मामले की सुनवाई के दौरान माननीय न्यायालय के समक्ष ठोस साक्ष्य प्रस्तुत करना एक बड़ी चुनौती थी। विवेचक उपनिरीक्षक सुधीर कुमार द्वारा संकलित किए गए वैज्ञानिक और दस्तावेजी साक्ष्यों ने मामले को साबित करने में निर्णायक भूमिका निभाई। इसके अतिरिक्त, अभियुक्त के जुर्म इकबाल और गवाहों के बयानों ने मामले को तार्किक निष्कर्ष तक पहुँचाने में मदद की।
न्यायालय ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अभियुक्त बलराम को दोषी करार दिया। सजा सुनाते हुए न्यायाधीश ने न केवल 20 वर्ष के सश्रम कारावास का आदेश दिया, बल्कि उस पर 60,000 रुपये का अर्थदंड भी आरोपित किया। यह दंड इस बात का संकेत है कि नाबालिगों के प्रति होने वाले अपराधों में कानून किसी भी स्तर पर नरमी नहीं बरतेगा।
कानूनी टीम का योगदान
इस कानूनी लड़ाई को अंजाम तक पहुँचाने में जिला अभियोजन कार्यालय और पुलिस टीम का सराहनीय योगदान रहा। इस पूरी प्रक्रिया में निम्नलिखित अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही:
- एपीओ शैलेन्द्री सिंह, जिन्होंने प्रभावी पैरवी की।
- विवेचक उपनिरीक्षक सुधीर कुमार, जिन्होंने साक्ष्यों का संकलन किया।
- कोर्ट मोहर्रिर हेड कांस्टेबल पाहुल पाठक।
- महिला कांस्टेबल ललिता।
- कोर्ट पैरोकार कांस्टेबल संजय।
- जनपद मैनपुरी की मॉनीटरिंग सेल।
इन सभी के समन्वित प्रयासों से ही पीड़ित पक्ष को न्याय मिल सका। इस फैसले से समाज में एक कड़ा संदेश गया है कि महिलाओं और बच्चों के विरुद्ध अपराध करने वालों को कानून के लंबे हाथों से बचना संभव नहीं है। मैनपुरी पुलिस और अभियोजन पक्ष की इस तत्परता की स्थानीय स्तर पर सराहना की जा रही है।
न्यायालय का यह निर्णय न केवल पीड़ित के परिवार को न्याय दिलाने वाला है, बल्कि यह अन्य संभावित अपराधियों के लिए एक चेतावनी भी है। पोक्सो एक्ट के तहत मामलों में इस प्रकार की कठोर सजाएं समाज में सुरक्षा का वातावरण बनाने में सहायक सिद्ध होती हैं। पुलिस विभाग द्वारा समय-समय पर मॉनीटरिंग सेल के माध्यम से ऐसे मामलों की समीक्षा की जाती है, ताकि लंबित मुकदमों का निस्तारण समयबद्ध तरीके से किया जा सके।
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