ऑपरेशन के नाम पर मौत का खेल! प्रसूता के पेट में छोड़ा सड़ा मांस, दोबारा ऑपरेशन से बची जान

May 27, 2026 - 07:11
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ऑपरेशन के नाम पर मौत का खेल! प्रसूता के पेट में छोड़ा सड़ा मांस, दोबारा ऑपरेशन से बची जान

ऑपरेशन के नाम पर मौत का खेल! प्रसूता के पेट में छोड़ा सड़ा मांस, दोबारा ऑपरेशन से बची जान

फर्रुखाबाद के ग्लोबल हॉस्पिटल पर गंभीर आरोप, पीड़िता ने डीएम से लगाई न्याय की गुहार

फर्रुखाबाद। जिले के एक निजी अस्पताल पर इलाज के नाम पर गंभीर लापरवाही और मरीज की जान से खिलवाड़ करने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। शहर के चर्चित ग्लोबल हॉस्पिटल के डॉक्टरों पर एक प्रसूता महिला ने गलत ऑपरेशन करने, अभद्र व्यवहार करने और अवैध तरीके से खून चढ़ाने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। मामले ने स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। पीड़िता श्रीमती शबीना ने जिलाधिकारी को दिए शिकायती पत्र में बताया कि डिलीवरी के दौरान अस्पताल के डॉक्टरों द्वारा ऑपरेशन में भारी लापरवाही बरती गई। आरोप है कि ऑपरेशन के बाद पेट में अंदरूनी हिस्से में मांस का लोथड़ा जमा हो गया, जिससे गांठ बन गई और उसमें मवाद भरने लगा। धीरे-धीरे महिला की हालत बिगड़ती चली गई और असहनीय दर्द शुरू हो गया। पीड़िता के अनुसार जब वह दोबारा इलाज और शिकायत लेकर अस्पताल पहुंची तो डॉक्टरों ने सही जानकारी देने के बजाय उसके साथ अभद्रता की और गाली-गलौज कर अस्पताल से भगा दिया।

हालत ज्यादा खराब होने पर परिजन महिला को आगरा के सर्वोदय हॉस्पिटल ले गए, जहां डॉक्टरों ने दोबारा ऑपरेशन किया। वहां जांच में पेट के अंदर सड़ा हुआ मांस मिलने की बात सामने आई, जिसे निकालने के बाद महिला की जान बच सकी। मामले में एक और बड़ा आरोप यह भी लगाया गया है कि अस्पताल में बिना लाइसेंस प्राप्त ब्लड बैंक और बिना जरूरी जांच के मरीजों को खून चढ़ाया जा रहा था। शिकायतकर्ता का कहना है कि यह सीधे तौर पर मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ है और किसी बड़े हादसे को न्योता देने जैसा है। पीड़िता ने जिलाधिकारी से अस्पताल को सील करने, पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषी डॉक्टरों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। वहीं अदालत ने भी मामले की गंभीरता को देखते हुए भारतीय दंड संहिता की धारा 308 और 504 के तहत संज्ञान लिया है। इस घटना के सामने आने के बाद जिले में निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर फिर सवाल उठने लगे हैं। लोगों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग की ढिलाई के कारण कई निजी अस्पताल बिना मानकों के संचालित हो रहे हैं और मरीजों की जिंदगी जोखिम में डाली जा रही है।

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