देश से पहले, बिहार में घर बैठे मोबाइल से वोटिंग का ट्रायल

Jun 30, 2025 - 19:58
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देश से पहले, बिहार में घर बैठे मोबाइल से वोटिंग का ट्रायल

देश से पहले, बिहार में घर बैठे मोबाइल से वोटिंग का ट्रायल

अजय कुमार,वरिष्ठ पत्रकार

चुनाव प्रक्रिया को सुलभ और मतदान व्यवस्था का सुगम बनाने के क्रम में 28 जून 2025 को बिहार ने इतिहास रच दिया। देश में पहली बार, बिहार के नगर निकाय चुनावों और उपचुनावों में मोबाइल आधारित ई-वोटिंग प्रणाली लागू की गई। यह पहल बिहार राज्य निर्वाचन आयोग की थी, जिसने ई-एसईसीबीएचआर नामक एक एंड्रॉयड ऐप लॉन्च किया। इस ऐप ने मतदाताओं को घर बैठे अपने स्मार्टफोन से वोट डालने की सुविधा दी, खासकर वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगों और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए। इसी के साथ पूर्वी चंपारण की विभा कुमारी ने देश की पहली ई-वोटर बनकर इतिहास में अपना नाम दर्ज किया।

उन्होंने अपने मोबाइल फोन से वोट डाला और इस नई तकनीक की ताकत को दुनिया के सामने लाया। विभा ने बताया कि मैं बीमार थी और पोलिंग बूथ तक जाना मुश्किल था। इस ऐप ने मुझे मेरे घर से ही लोकतंत्र का हिस्सा बनने का मौका दिया । ई-वोटिंग सिस्टम से वोटिंग में हर वोट को फेस वेरिफिकेशन और वोटर आईडी के जरिए क्रॉस-वेरिफाई किया गया, जिससे प्रक्रिया पूरी तरह सुरक्षित रही। बिहार के छह नगर निगमों पटना, रोहतास और पूर्वी चंपारण में इस पायलट प्रोजेक्ट को लागू किया गया। आंकड़ों के मुताबिक, 69.49 फीसदी से 70.20 फीसदी मतदाताओं ने इस नई प्रणाली का उपयोग किया, जो पारंपरिक ईवीएम से 16 प्रतिशत अधिक थी। यह तकनीक न केवल सुविधाजनक थी, बल्कि प्रवासी भारतीयों और दूरस्थ मतदाताओं के लिए भी वरदान साबित हुई। हालांकि, इस नई प्रणाली को लेकर कुछ सवाल भी उठे। कुछ लोगों ने ऐप की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई, जैसे कि क्या इसे हैक किया जा सकता है या वोटर लिस्ट में हेरफेर संभव है। सोशल मीडिया पर कुछ यूजर्स ने इसे प्री-प्रायोजित एजेंडा तक करार दिया। लेकिन निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया कि सख्त सत्यापन प्रक्रिया और 5जी कनेक्टिविटी ने इसे सुरक्षित बनाया। फिर भी, इस पायलट प्रोजेक्ट के परिणामों का विश्लेषण भविष्य में विधानसभा चुनावों के लिए इसके उपयोग पर निर्णय लेगा।

बिहार की इस पहल ने पूरे देश में एक नई बहस छेड़ दी। सवाल उठ रहे हैं कि क्या मोबाइल वोटिंग भारत के लोकतंत्र को और सुलभ बनाएगी? बिहार के इस प्रयोग ने दिखाया कि तकनीक और लोकतंत्र का मेल संभव है। राज्य निर्वाचन आयुक्त डॉ. दीपक प्रसाद ने कहा, यह एक शुरुआत है। हमारा लक्ष्य हर मतदाता तक पहुँचना है। इस सफलता ने बिहार को न केवल तकनीकी नवाचार का अग्रदूत बनाया, बल्कि देश के अन्य राज्यों के लिए भी एक मिसाल कायम की।

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