खनिजों में छिपी भू-राजनीति

Jun 29, 2025 - 09:25
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खनिजों में छिपी भू-राजनीति

खनिजों में छिपी भू-राजनीति

रेयर अर्थ तत्वों को लेकर वर्तमान वैश्विक राजनीति निर्णायक मोड़ पर आ चुकी है। ये तत्व केवल तकनीकी उपकरणों का आधार नहीं हैं, बल्कि इनके माध्यम से वैश्विक शक्ति संतुलन भी प्रभावित हो रहा है। अमेरिका और चीन के बीच हाल में हुआ व्यापारिक टकराव इसका प्रमाण है। पहले जेनेवा में इसको लेकर समझौता हुआ, लेकिन अमेरिका द्वारा हुआवे की सेमीकंडकर चिप पर प्रतिबंध के बाद वह टूट गया। इसके जवाब में चीन ने रेयर अर्थ तत्वों के निर्यात पर रोक लगाई, जिससे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हुई। अमेरिका ने भी चीनी छात्रों के वीजा रद किए।

इसके बाद लंदन में नया समझौता हुआ, जिसमें टैरिफ में राहत और पाबंदियों पर पुनर्विचार हुआ। मूल समस्या रेयर अर्थ तत्वों की आपूर्ति को लेकर है । ये 17 विशेष प्रकार की धातुएं हैं जिनका उपयोग इलेक्ट्रिक मोटरों, मोबाइल फोन, मिसाइल गाइडेंस सिस्टम, विंड टर्बाइन और रक्षा उपकरणों में होता है। इनका उपयोग उपकरणों को हल्का, शक्तिशाली और ऊर्जा- कुशल बनाता है। यद्यपि ये पृथ्वी पर प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं, इन्हें अलग करना तकनीकी और पर्यावरणीय रूप से जटिल है। इस प्रक्रिया में भारी मात्रा में एसिड और विशेष रासायनिक संयंत्रों की आवश्यकता होती है। चीन इस क्षेत्र में सबसे आगे है। वह वैश्विक रेयर अर्थ खनन का 70 प्रतिशत और प्रोसेसिंग का 90 प्रतिशत करता है। उसके पास उच्च दक्षता वाली प्रोसेसिंग तकनीक है, जिससे वह विश्व तकनीकी बाजार में रणनीतिक बढ़त बनाए हुए है। जब उसने निर्यात पर रोक लगाई, तो भारत सहित कई देशों की कंपनियां प्रभावित हुईं। सुजुकी ने स्विफ्ट कार का निर्माण स्थगित किया और अन्य वैश्विक कंपनियों को भी संकट झेलना पड़ा। भारत के पास रेयर अर्थ के पर्याप्त भंडार हैं- वैश्विक कुल का लगभग छह प्रतिशत, लेकिन भारत केवल एक प्रतिशत का उत्पादन करता है। केरल, आंध्र प्रदेश, ओडिशा और राजस्थान में इसके भंडार मौजूद हैं, लेकिन प्रोसेसिंग की तकनीक और निवेश की कमी के कारण भारत चीन पर निर्भर है। 2023- 24 में भारत ने 2270 टन रेयर अर्थ तत्वों का आयात किया, जिनमें से अधिकांश चीन से आए।

अब भारत को इस निर्भरता से बाहर निकलने की आवश्यकता है। इसके लिए एक समग्र राष्ट्रीय नीति बनानी होगी जिसमें खनन, प्रोसेसिंग और उपयोग सभी स्तरों पर रणनीति तैयार हो । निजी और सरकारी क्षेत्र को मिलकर निवेश करना होगा। साथ ही भारत को रेयर अर्थ का एक रणनीतिक भंडार भी बनाना चाहिएए | रेयर अर्थ तत्वों की यह जंग केवल खनन की नहीं, बल्कि भविष्य की तकनीकी संप्रभुता की है। अगर भारत को 'मेक इन इंडिया' और आत्मनिर्भरता को साकार करना है तो उसे इस दिशा में निर्णायक कदम उठाने होंगे।

विजय गर्ग सेवानिवृत्त प्रिंसिपल मलोट पंजाब

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