बुजुर्ग की महत्ता

Jun 27, 2025 - 08:31
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बुजुर्ग की महत्ता

देश में 16वीं जनगणना की अधिसूचना जारी हो चुकी है। देश में यह पहली ऐसी जनगणना होगी, जहां आंकड़ों का संकलन कागज- कलम से न होकर डिजिटल आधार पर किया जाएगा। 2011 के बाद होने वाली इस जनगणना में जाति गणना भी शामिल होगी। इस जनगणना से भारत में गरीबी, शिक्षा, लोगों की आय, लिंगानुपात, जाति, पंथ, अमीरी-गरीबी, युवा-बुजुर्ग इत्यादि की तस्वीर साफ होगी।

अभी हम युवा देश हैं, परंतु हाल में देश में लिंगानुपात से संबंधित जो रपटें आई हैं, उनमें देश में वृद्धजनों की बढ़ती आबादी का आकलन किया गया है। इस पर ध्यान दिया जाना चाहिए। पहली रिपोर्ट प्लेसेस नामक जर्नल में प्रकाशित हुई है। इसके आंकड़े बताते हैं कि आज भारत का हर चौथा - पांचवां बुजुर्ग स्मृति लोप, भाषा का ठीक से प्रयोग न करने, सोचने-समझने एवं निर्णय लेने की क्षमता के कमजोर हो जाने जैसी समस्याओं से जूझ रहा है। दूसरी रिपोर्ट भारतीय स्टेट बैंक ने जारी की है। इसके अनुसार भारत की कामकाजी आबादी की औसत आयु 2021 में 24 वर्ष के मुकाबले साल 2026 में बढ़कर 28-29 वर्ष हो जाएगी। आज चीन की कामकाजी औसत आयु 39.5 साल है। वहीं यूरोप में यह 42 साल, उत्तरी अमेरिका में 38 एवं एशिया में 32 साल है। वैश्विक स्तर पर यह औसत आयु 30.4 वर्ष दर्ज की गई है। एसबीआइ की रिपोर्ट संकेत देती है कि भारत में शून्य से चौदह साल के बच्चों की आबादी में गिरावट आ रही है। 1991 में इनकी जो आबादी 36.4 करोड़ थी, वह 2026 में घटकर 34 करोड़ रहने वाली है।

आबादी में 1991 में इनकी जो हिस्सेदारी 37 प्रतिशत थी, वह वर्ष 2026 में घटकर 24.3 प्रतिशत रह जाएगी। इस प्रकार 60 साल से अधिक उम्र के लोगों की आबादी विगत ढाई दशक में बढ़कर दोगुनी हो गई है। इसका अर्थ है कि 2001 में बुजुर्गों की जो आबादी 7.9 करोड़ थी, वह साल 2026 में बढ़कर 15 करोड़ के आसपास पहुंच जाएगी। इनमें 7.7 करोड़ पुरुष तथा 7.3 करोड़ महिलाएं होंगी। इसी तरह वर्ष 2001 में देश में जो कामकाजी आबादी 58.6 करोड़ थी, 2026 में इसके बढ़कर 91 करोड़ होने का अनुमान है। माना जा रहा है कि अगली जनगणना में देश की कुल आबादी में 67 प्रतिशत हिस्सेदारी कामकाजी लोगों की होगी। इसी संदर्भ में तीसरी रिपोर्ट केंद्र सरकार के सांख्यिकी मंत्रालय ने प्रकाशित की है। यह बताती है कि देश में 2036 तक बच्चों एवं किशोरों की आबादी में गिरावट दर्ज होगी और बुजुर्गों एवं मध्यम उम्र के लोगों की संख्या बढ़ेगी। इस रिपोर्ट के अनुसार 2021 में आबादी में 15 वर्ष से कम उम्र के बच्चों की हिस्सेदारी 26.2 प्रतिशत थी, लेकिन 2026 में यह घटकर 20.6 प्रतिशत रह जाएगी। 2021 में 35-49 आयुवर्ग के लोगों की आबादी में हिस्सेदारी 19.1 प्रतिशत थी, परंतु 2026 में इस आयुवर्ग का प्रतिशत बढ़कर 23 प्रतिशत हो जाएगा।

वर्तमान में देश की आबादी में 60 वर्ष से अधिक आयुवर्ग के लोगों का प्रतिशत 9.5 है। 2036 में ऐसे लोगों की आबादी बढ़कर 13.9 प्रतिशत हो जाएगी। चौथी रिपोर्ट संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (यूएनएफपीए) की है। इसमें कहा गया है कि अगले 25 वर्षों में भारत की आबादी में 60 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों की हिस्सेदारी 20.8 प्रतिशत तक पहुंच जाएगी। अर्थात देश में हर पांचवां व्यक्ति बुजुर्ग की श्रेणी में होगा। 2024-2050 के बीच देश की कुल आबादी 18 प्रतिशत ही बढ़ेगी, मगर वृद्ध जनसंख्या में 134 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी होगी। इस रिपोर्ट के अनुसार 2022 2023 तक भारत में बुजुर्गों की आबादी 14.9 करोड़ थी। यानी कुल आबादी में इनका हिस्सा 10.5 प्रतिशत था। इस तरह देश में 100 कामकाजी लोगों पर 16 वृद्धजन निर्भर हैं। इससे देश में कामकाजी युवाओं और वृद्धजनों के बीच संतुलन के बिगड़ने की आशंका है। अभी संयुक्त राष्ट्र की नवीनतम जनसांख्यिकी रिपोर्ट से पता चला है कि 2025 के अंत तक भारत की आबादी दुनिया में सर्वाधिक 1.46 अरब तक पहुंच जाएगी। इस रिपोर्ट से देश की जनसंख्या संरचना, प्रजनन क्षमता एवं जीवन प्रत्याशा में भविष्य में बड़े परिवर्तन के संकेत मिलते हैं। उपरोक्त रपटों का सार यही है कि यदि भारत में बुजुर्गों की संख्या बढ़ रही है तो फिलहाल उससे कहीं बढ़े हुए अनुपात में कामकाजी युवक- युवतियों की संख्या भी बढ़ रही है ।

आज ब्रिक्स देशों में जन्म दर और जनसंख्या वृद्धि दर साल दर साल घट रही है। जापान, फ्रांस, जर्मनी, आस्ट्रेलिया एवं ब्रिटेन जैसे देशों में जनसंख्या के बढ़ने का स्तर अमूमन शून्य हो चुका है। निःसंदेह भविष्य में वहां वृद्धजनों की संख्या बढ़ेगी और कार्यशील जनसंख्या कम होती जाएगी। इससे उनका उत्पादन स्वतः ही घटेगा। भविष्य में भारत उन देशों में प्रमुख होगा, जहां कार्यशील युवा जनसंख्या सबसे अधिक होगी। प्रधानमंत्री मोदी 2047 तक जिस विकसित भारत की कल्पना कर रहे हैं, उसके लिए यदि युवाओं की ऊर्जा, शक्ति, उत्साह और सामर्थ्य देश के काम आएगा तो उसी अनुपात में वरिष्ठजनों का अनुभव भी भारत के निर्माण में पथ प्रदर्शक का कार्य करेगा। फिर भी आज की आवश्यकता यही है कि युवाओं के बेहतर भविष्य के साथ वरिष्ठजनों के लिए सामाजिक-आर्थिक सुरक्षा के भी प्रबंध हों।

विजय गर्ग सेवानिवृत्त प्रिंसिपल मलोट

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