फर्रुखाबाद: पिपरगांव प्रधान पर स्कूल भूमि पर अवैध वसूली का गंभीर आरोप
फर्रुखाबाद के पिपरगांव में ग्राम प्रधान पर स्कूल की सरकारी जमीन से अवैध वसूली और मनरेगा नियमों के उल्लंघन का आरोप लगा है। जिलाधिकारी ने जांच के आदेश दिए हैं।
फर्रुखाबाद जिले के विकास खण्ड मोहम्मदाबाद अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत पिपरगांव इन दिनों गंभीर आरोपों को लेकर चर्चाओं में है। ग्राम पंचायत के निवासी शैलेश दीक्षित ने जिलाधिकारी को एक औपचारिक शिकायती पत्र सौंपकर ग्राम प्रधान पर सरकारी संपत्तियों के दुरुपयोग और अवैध वसूली का आरोप लगाया है। इस शिकायत ने स्थानीय प्रशासन में हड़कंप मचा दिया है।
सरकारी भूमि पर अवैध वसूली का आरोप
शिकायतकर्ता शैलेश दीक्षित के अनुसार, ग्राम पंचायत पिपरगांव में गाटा संख्या 1336, जिसका रकबा 1.060300 हेक्टेयर है, आधिकारिक रूप से विद्यालय के नाम दर्ज है। आरोप है कि ग्राम प्रधान इस सरकारी भूमि का उपयोग निजी लाभ के लिए कर रहे हैं। शिकायत में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि प्रधान द्वारा गांव के निवासी रामवीर, विशाल और रंगीललाल को यह जमीन प्रति बीघा 10,000 रुपये वार्षिक की दर से किराए पर दी गई है। इस प्रकार, विद्यालय की जमीन से होने वाली आय को सरकारी कोष में जमा करने के बजाय प्रधान द्वारा स्वयं वसूला जा रहा है, जो कि सीधे तौर पर भ्रष्टाचार की श्रेणी में आता है।
चकरोट निर्माण में मनरेगा नियमों की अनदेखी
विद्यालय की जमीन के अलावा, दूसरा गंभीर मामला चकरोट निर्माण से जुड़ा है। शैलेश दीक्षित ने जिलाधिकारी को दिए गए अपने दूसरे प्रार्थना पत्र में बताया है कि गांव में चकरोट डालने का कार्य पूरी तरह से मनमाने ढंग से किया जा रहा है। सरकारी नियमों के अनुसार, ग्राम सभा के विकास कार्यों में चकरोट या अन्य निर्माण कार्य मनरेगा के अंतर्गत पंजीकृत मजदूरों द्वारा कराए जाने चाहिए ताकि उन्हें रोजगार मिल सके।
हालांकि, पिपरगांव में मनरेगा के मजदूरों के स्थान पर जेसीबी (JCB) मशीनों का उपयोग करके चकरोट डाला जा रहा है। शिकायतकर्ता का दावा है कि गाटा संख्या 858, आराजी 0.393 पर मिट्टी डालने के कार्य में मशीनों का प्रयोग शासन की मंशा के विपरीत है। इससे न केवल सरकारी धन का दुरुपयोग हो रहा है, बल्कि स्थानीय मजदूरों के हक पर भी डाका डाला जा रहा है।
प्रधान पर धमकी देने का आरोप
इस पूरे प्रकरण में सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई है कि जब ग्रामीणों ने इस अवैध कार्य का विरोध किया, तो ग्राम प्रधान ने अपनी शक्ति का दुरुपयोग करते हुए उन्हें धमकाया। शिकायतकर्ता के अनुसार, प्रधान ने खुलेआम कहा कि वे ग्राम प्रधान हैं और जो चाहेंगे वही करेंगे। प्रधान ने यह भी चुनौती दी कि उन्हें जहां शिकायत करनी हो कर लें, क्योंकि उनका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता। यह बयान न केवल उनके अहंकार को दर्शाता है, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था के प्रति उनकी जवाबदेही की कमी को भी उजागर करता है।
प्रशासनिक कार्रवाई की उम्मीद
पिपरगांव के निवासियों द्वारा लगाए गए इन गंभीर आरोपों को जिलाधिकारी ने गंभीरता से लिया है। सूत्रों के अनुसार, इन शिकायतों पर संज्ञान लेते हुए जिलाधिकारी ने मामले की निष्पक्ष जांच के आदेश दिए हैं। ग्रामीणों को उम्मीद है कि अब जांच के बाद सत्य सामने आएगा और दोषी पाए जाने पर ग्राम प्रधान के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। सरकारी जमीन का निजी उपयोग और मनरेगा में धांधली जैसे मुद्दे न केवल स्थानीय विकास को प्रभावित करते हैं, बल्कि जनता का शासन-प्रशासन से भरोसा भी कम करते हैं। अब देखना यह होगा कि जांच रिपोर्ट में क्या तथ्य सामने आते हैं और क्या प्रशासन इन आरोपों को सिद्ध कर पाता है।
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