मैनपुरी: स्वच्छताग्राहियों ने मानदेय वृद्धि और बकाया भुगतान की मांग की
मैनपुरी में स्वच्छताग्राहियों ने मानदेय 15 से 18 हजार करने और बकाया भुगतान की मांग को लेकर जिलाधिकारी को सौंपा ज्ञापन। जानें पूरी खबर।
ग्रामीण अंचलों में स्वच्छता व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने वाले स्वच्छताग्राहियों ने अपनी दयनीय आर्थिक स्थिति और कम मानदेय को लेकर जिला प्रशासन के समक्ष आवाज बुलंद की है। सोमवार की दोपहर लगभग तीन बजे स्वच्छताग्राहियों के संगठन ने एकजुट होकर जिला मजिस्ट्रेट के माध्यम से मुख्यमंत्री को एक ज्ञापन प्रेषित किया है। अपनी मांगों को लेकर मुखर इन कर्मचारियों का कहना है कि वे गांवों की सफाई और स्वच्छता के लिए पूरी निष्ठा के साथ काम कर रहे हैं, लेकिन बदले में मिलने वाला पारिश्रमिक उनके और उनके परिवारों के जीवन-यापन के लिए पर्याप्त नहीं है।
आर्थिक संकट और मानदेय की समस्या
संगठन के जिलाध्यक्ष अनुज कुमार ने इस विषय पर विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि न्याय पंचायतों और गांवों के स्तर पर तैनात ये कर्मचारी दिन-रात मेहनत कर रहे हैं। इसके एवज में मिलने वाला अल्प पारिश्रमिक और उस पर भी समय से भुगतान न होने के कारण इन कर्मचारियों के सामने अपने परिवारों का भरण-पोषण करने का गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि महंगाई के इस दौर में वर्तमान मानदेय में घर चलाना असंभव सा हो गया है।
शासन से की गई प्रमुख मांगें
प्रदर्शनकारी कर्मचारियों ने शासन को याद दिलाया कि एक अक्टूबर 2023 को सीतापुर के नैमिषारण्य में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री द्वारा दैनिक पारिश्रमिक पर काम करने वाले कर्मचारियों को गुजारे योग्य मानदेय दिए जाने की बात कही गई थी। कर्मचारियों ने मांग की है कि:
- मासिक मानदेय को बढ़ाकर 15,000 रुपये से 18,000 रुपये के बीच निर्धारित किया जाए।
- लंबित पड़े भुगतान का निस्तारण अविलंब सुनिश्चित किया जाए।
- भुगतान प्रक्रिया को समयबद्ध बनाया जाए ताकि भविष्य में देरी न हो।
कर्मचारियों का कहना है कि मानदेय वृद्धि की आवश्यकता के संबंध में बार-बार अवगत कराने के बावजूद अभी तक कोई अपेक्षित व ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। यही कारण है कि उन्हें अपनी मांगों को प्रशासन के समक्ष लाने के लिए मजबूर होना पड़ा है।
पूर्व के प्रयास और भविष्य की रणनीति
अपनी इन वाजिब मांगों को शासन तक पहुंचाने के लिए ये कर्मचारी पूर्व में लखनऊ के इको गार्डन में भी शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर चुके हैं। वहां भी उन्होंने अपनी समस्याओं को प्रमुखता से उठाया था, लेकिन समाधान न मिलने से उनमें मायूसी है। अब उन्होंने जिलाधिकारी से इस गंभीर मामले में व्यक्तिगत रुचि लेकर शासन तक मांग पहुंचाने और परिवारों का गुजारा चलाने योग्य पारिश्रमिक निर्धारित कराने की पुरजोर अपील की है।
स्वच्छताग्राहियों ने स्पष्ट किया है कि यदि उनकी मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं की गई, तो वे अपने संघर्ष को और अधिक तेज करने के लिए बाध्य होंगे। फिलहाल, जिला प्रशासन की ओर से ज्ञापन प्राप्त कर लिया गया है, और अब देखना यह है कि शासन स्तर पर इस पर क्या प्रतिक्रिया सामने आती है। ग्रामीण स्वच्छता के प्रति समर्पित इन कर्मचारियों को उम्मीद है कि सरकार उनकी समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए जल्द ही राहत प्रदान करेगी।
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