राष्ट्रीय पोषण माह 2026: सुपोषित भारत के लिए जन आंदोलन का शुभारंभ
वाराणसी में 9वें राष्ट्रीय पोषण माह 2026 का शुभारंभ। आंगनवाड़ी केंद्रों को सुदृढ़ बनाने और पोषण को जन आंदोलन बनाने पर जोर।
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने वाराणसी के रुद्राक्ष इंटरनेशनल कोऑपरेशन एंड कन्वेंशन सेंटर में 9वें राष्ट्रीय पोषण माह 2026 का भव्य शुभारंभ किया। 'हमारी आंगनवाड़ी, हमारी ज़िम्मेदारी' विषय पर आधारित यह एक महीने का राष्ट्रव्यापी अभियान पोषण के प्रति जागरूकता फैलाने और जमीनी स्तर पर सेवा वितरण को मजबूत करने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है। इस कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती अन्नपूर्णा देवी और राज्य मंत्री श्रीमती सावित्री ठाकुर सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
आंगनवाड़ी केंद्रों की बदलती भूमिका
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में कहा कि आंगनवाड़ी केंद्र अब मात्र सरकारी दफ्तर नहीं, बल्कि जीवंत सामुदायिक संस्थान बन गए हैं। उन्होंने बताया कि स्मार्टफोन के उपयोग और डिजिटल निगरानी से डेटा प्रविष्टि में पारदर्शिता आई है। मुख्यमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि बच्चों और गर्भवती महिलाओं को गर्म पका भोजन और राशन उपलब्ध कराने से राज्य में पोषण के स्तर में सुधार हुआ है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पोषण में किया गया निवेश भविष्य की पीढ़ी को स्वस्थ, सशक्त और आत्मनिर्भर बनाता है, जो एक मजबूत राष्ट्र की नींव है।
सरकारी प्रतिबद्धता और मिशन सक्षम आंगनवाड़ी
केंद्रीय मंत्री श्रीमती अन्नपूर्णा देवी ने बताया कि वर्तमान में 14 लाख से अधिक आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से 7.5 करोड़ से अधिक बच्चों और 1.10 करोड़ से अधिक गर्भवती एवं स्तनपान कराने वाली महिलाओं तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाई जा रही हैं। उन्होंने 'मिशन सक्षम आंगनवाड़ी' के तहत दो लाख केंद्रों को उन्नत बनाने की योजना पर प्रकाश डाला। साथ ही, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के 10 सफल वर्षों का उल्लेख करते हुए बताया कि इसके माध्यम से 4.65 करोड़ माताओं को 21 हजार करोड़ रुपये से अधिक की सहायता सीधे उनके खातों में भेजी गई है।
पोषण माह 2026 के प्रमुख लक्ष्य
राष्ट्रीय पोषण माह 2026 के दौरान 9 सितंबर से 8 अक्टूबर तक विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा। इस अभियान के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
- आहार विविधता: भोजन में प्रोटीन की पर्याप्त मात्रा और पोषक तत्वों की विविधता को बढ़ावा देना।
- ताजा भोजन: आंगनवाड़ी केंद्रों में बच्चों को ताजा और गर्म पका भोजन उपलब्ध कराना।
- सामुदायिक स्वामित्व: आंगनवाड़ी प्रबंधन समितियों के माध्यम से स्थानीय स्तर पर जवाबदेही तय करना।
- प्रारंभिक विकास: बच्चों के शुरुआती वर्षों में पोषण और शिक्षा पर विशेष ध्यान देना।
महिला एवं बाल विकास सचिव श्री अनिल मलिक ने कहा कि पोषण अभियान अब एक सरकारी कार्यक्रम से आगे बढ़कर एक व्यापक जन आंदोलन बन चुका है। कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना की उपलब्धियों पर आधारित एक फिल्म भी दिखाई गई, जिसने मातृ स्वास्थ्य में आए सकारात्मक बदलावों को रेखांकित किया। यह अभियान 2047 तक 'सुपोषित भारत' और 'विकसित भारत' के संकल्प को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। सभी नागरिकों, पंचायती राज संस्थाओं और स्वयं सहायता समूहों से इस अभियान में सक्रिय भागीदारी करने का आह्वान किया गया है ताकि पोषण का संदेश घर-घर तक पहुंच सके।
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