अमृतपुर: फखरपुर जालिम में 21 दिनों से बाढ़ का कहर, प्रशासन मौन
अमृतपुर के फखरपुर जालिम गांव में 21 दिनों से बाढ़ का पानी भरा है। स्वास्थ्य सेवाओं और राहत सामग्री के अभाव में ग्रामीण प्रशासन से मदद की गुहार लगा रहे हैं।
अमृतपुर क्षेत्र का फखरपुर जालिम गांव इन दिनों एक ऐसी त्रासदी से जूझ रहा है, जिसे स्थानीय प्रशासन की अनदेखी ने और भी भयावह बना दिया है। पिछले 21 दिनों से गांव पूरी तरह से जलमग्न है, जिससे जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। चारों तरफ फैला पानी केवल खेतों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अब रिहायशी इलाकों और घरों के भीतर तक घुस चुका है, जिससे ग्रामीणों का जीना दूभर हो गया है।
राहत के इंतजार में बीत रहे दिन
गांव के मुख्य रास्तों पर चार से पांच फीट तक पानी भरा हुआ है। आवागमन का कोई सुरक्षित साधन न होने के कारण ग्रामीण अपनी जान जोखिम में डालकर पानी के बीच से निकलने को मजबूर हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि तीन सप्ताह बीत जाने के बाद भी सरकारी स्तर पर राहत के कोई ठोस इंतजाम दिखाई नहीं दे रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि उन्हें न तो पर्याप्त राहत सामग्री मिली है और न ही प्रशासन की ओर से कोई मेडिकल टीम ही गांव तक पहुंची है।
स्वास्थ्य सुविधाओं का घोर अभाव
बाढ़ के इस दौर में बीमारियों का खतरा बढ़ गया है, लेकिन स्वास्थ्य सेवाओं की अनुपलब्धता ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। रिंकू की पत्नी कीर्ति के सात माह के मासूम बेटे आरुष को तेज बुखार ने अपनी चपेट में ले लिया। गांव में दवा की एक गोली तक उपलब्ध नहीं थी, जिसके कारण परिजनों को अपने बीमार बच्चे के लिए पानी के बीच से संघर्ष करते हुए बाहर निकलना पड़ा। यह घटना उस कड़वी सच्चाई को बयां करती है कि यदि किसी ग्रामीण की हालत अचानक गंभीर हो जाए, तो उसे अस्पताल तक पहुंचाना वर्तमान परिस्थितियों में लगभग असंभव है।
प्रशासन से ग्रामीणों की अपील
ग्रामीणों का कहना है कि वे अब केवल कोरे आश्वासनों से थक चुके हैं। उनकी मांग है कि प्रशासन तुरंत प्रभाव से गांव में मेडिकल कैंप स्थापित करे, ताकि बच्चों और बुजुर्गों को समय पर इलाज मिल सके। इसके अलावा, बाढ़ से प्रभावित परिवारों को राशन और अन्य आवश्यक राहत सामग्री का वितरण करना भी अत्यंत आवश्यक है। घरों में पानी घुसने के कारण लोगों का सामान खराब हो रहा है और उनके लिए चूल्हा जलाना तक मुश्किल हो गया है।
क्या प्रशासन की नजर से ओझल है गांव?
स्थानीय लोग अब यह सवाल पूछने पर मजबूर हैं कि क्या उनकी पीड़ा प्रशासन के अधिकारियों तक नहीं पहुंच रही है? 21 दिनों का समय कोई छोटा अंतराल नहीं होता, लेकिन इस दौरान किसी भी जवाबदेह अधिकारी का गांव का दौरा न करना प्रशासनिक उदासीनता को दर्शाता है। क्या प्रशासन किसी अनहोनी का इंतजार कर रहा है? फखरपुर जालिम के निवासी अब उम्मीद लगाए बैठे हैं कि उनकी इस दुर्दशा का संज्ञान लिया जाएगा और जल्द ही उन्हें बाढ़ के इस संकट से उबारने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएंगे।
बाढ़ प्रभावित गांवों में स्वास्थ्य और सुरक्षा के प्रति यह लापरवाही न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं के प्रति भी संवेदनहीनता का परिचायक है। समय रहते यदि ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो स्थिति और भी अधिक विकराल रूप धारण कर सकती है।
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