फर्रुखाबाद: अनुसूचित जाति आयोग के सदस्य ने अधिकारियों को दिए सख्त निर्देश
उत्तर प्रदेश अनुसूचित जाति आयोग के सदस्य रमेश कुंडे ने फर्रुखाबाद में जनसुनवाई कर अधिकारियों को लंबित समस्याओं के त्वरित और गुणवत्तापूर्ण निस्तारण के निर्देश दिए।
फर्रुखाबाद में आयोजित एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक के दौरान उत्तर प्रदेश अनुसूचित जाति आयोग के सदस्य श्री रमेश कुंडे ने जन समस्याओं के प्रति कड़ा रुख अपनाते हुए अधिकारियों को सख्त निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि आम जनता की शिकायतों को प्राथमिकता के आधार पर हल करना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। बैठक में जिला स्तरीय अधिकारियों की उपस्थिति में विभिन्न विभागों द्वारा संचालित योजनाओं और लंबित शिकायतों पर गहन चर्चा की गई।
जनता की समस्याओं पर आयोग की कड़ी निगरानी
आयोग सदस्य ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि शासन की मंशा है कि अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक सरकारी लाभ पहुँचें। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि जनसुनवाई के दौरान प्राप्त शिकायतों के निस्तारण में किसी भी प्रकार की हीलाहवाली बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि किसी अधिकारी द्वारा लापरवाही बरती जाती है, तो उनकी जवाबदेही तय की जाएगी और आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि शिकायतकर्ता को बार-बार कार्यालयों के चक्कर न काटने पड़ें, इसके लिए विभागीय स्तर पर बेहतर समन्वय की आवश्यकता है।
प्राथमिकता के आधार पर निस्तारण के निर्देश
बैठक में विशेष रूप से अनुसूचित जाति वर्ग से संबंधित समस्याओं पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया। श्री कुंडे ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि पीड़ितों को त्वरित राहत पहुँचाने के लिए एक पारदर्शी कार्यप्रणाली अपनाई जाए। उन्होंने सुझाव दिया कि लंबित मामलों का समयबद्ध निस्तारण करने के साथ-साथ शिकायतकर्ता को की गई कार्रवाई के बारे में सूचित करना भी अनिवार्य है। इससे न केवल प्रशासनिक पारदर्शिता बढ़ती है, बल्कि आम जनता का सरकारी तंत्र पर विश्वास भी सुदृढ़ होता है। बैठक में मौके पर ही कई समस्याओं का समाधान किया गया, जिससे फर्रुखाबाद के स्थानीय निवासियों को बड़ी राहत मिली है।
प्रशासनिक जवाबदेही और सेवा का संकल्प
आयोग सदस्य ने कहा कि सरकारी व्यवस्था का मूल उद्देश्य ही जनसेवा है। उन्होंने उपस्थित अधिकारियों से कहा कि प्रत्येक समस्या को पूरी संवेदनशीलता के साथ लिया जाए। उन्होंने निम्न बिंदुओं पर विशेष जोर दिया:
- समयबद्धता: हर शिकायत का एक निश्चित समय सीमा के भीतर समाधान अनिवार्य है।
- गुणवत्ता: निस्तारण ऐसा हो कि शिकायतकर्ता को दोबारा उसी समस्या के लिए न आना पड़े।
- संवेदनशीलता: पीड़ितों के साथ सहानुभूतिपूर्ण व्यवहार प्रशासनिक अधिकारियों की पहली पहचान होनी चाहिए।
- समन्वय: विभिन्न विभागों के बीच बेहतर तालमेल से जटिल समस्याओं को आसानी से सुलझाया जा सकता है।
बैठक के दौरान जिला पुलिस अधीक्षक, अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व), अपर जिलाधिकारी (न्यायिक), जिला समाज कल्याण अधिकारी, जिला विद्यालय निरीक्षक, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी और समस्त अधिशासी अधिकारी सहित अन्य संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। अंत में, आयोग सदस्य ने सभी को निष्पक्ष और प्रभावी कार्यप्रणाली अपनाने के लिए प्रेरित किया, ताकि फर्रुखाबाद जनपद में शासन की योजनाओं का लाभ प्रत्येक पात्र व्यक्ति तक बिना किसी भेदभाव के पहुँचाया जा सके। यह बैठक जिले में जनहित के कार्यों को गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
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