मैनपुरी में छात्र न्याय आंदोलन के बाद भाजपा नेता किशन दुबे की गिरफ्तारी पर गरमाया माहौल, पुलिस पर उठे गंभीर सवाल
मैनपुरी में छात्र न्याय आंदोलन के बाद भाजपा नेता किशन दुबे की गिरफ्तारी पर गरमाया माहौल, पुलिस पर उठे गंभीर सवाल
मैनपुरी (अजय किशोर) मैनपुरी जिले में सोमवार का दिन राजनीतिक गलियारों के लिए बेहद उथल-पुथल भरा साबित हुआ, जब वर्ष 2008 के एक पुराने आर्म्स एक्ट के मामले में भाजपा नेता किशन दुबे की नाटकीय गिरफ्तारी ने पूरे प्रशासनिक तंत्र में हलचल मचा दी। जैसे ही इस कार्रवाई की खबर उनके समर्थकों तक पहुँची, स्थानीय कोतवाली के बाहर भारी भीड़ जमा हो गई और लोगों ने पुलिस प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी शुरू कर दी। इस अचानक हुई कार्रवाई ने स्थानीय राजनीति को गरमा दिया है और सत्ता के गलियारों में सुगबुगाहट तेज हो गई है। दरअसल, यह पूरा घटनाक्रम उस समय के बाद और अधिक गंभीर हो गया जब कुछ ही दिन पहले किशन दुबे ने सुदिती ग्लोबल एकेडमी के छात्र वंश कश्यप की संदिग्ध मौत के मामले में पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मांग को लेकर तिकोनिया पार्क भूख हड़ताल धरना में लगभग पांच दिनों तक अपने पूरे समर्थन के साथ खड़े रहे थे। उनके इस कड़े संघर्ष और जनता के भारी दबाव के बाद प्रशासन ने पीड़ित परिवार की मांगों पर सकारात्मक आश्वासन दिया था, जिसके बाद अनशन समाप्त कराया गया था।
हालांकि, इस सामाजिक आंदोलन के ठीक बाद एक पुराने मामले को फिर से तूल देकर की गई इस गिरफ्तारी ने समर्थकों के मन में गहरा रोष पैदा कर दिया है। गिरफ्तारी के बाद अपनी तीखी प्रतिक्रिया देते हुए किशन दुबे ने पुलिस प्रशासन की कार्यशैली को घिनौना और विश्वासघातपूर्ण करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिसकर्मी उनके घर पर पूरे भरोसे के साथ आए, शिष्टाचार निभाया और फिर इस तरह की अनुचित कार्रवाई को अंजाम दिया। दुबे ने दो टूक शब्दों में कहा कि उनका पूरा जीवन संघर्षों की भट्ठी में तपा है और वे ऐसी किसी भी दमनकारी नीति से डरने वाले नहीं हैं, बल्कि वे गरीबों और पिछड़ों के अधिकारों के लिए हमेशा आवाज उठाते रहेंगे। उन्होंने प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि इस कार्रवाई के पीछे कुछ प्रभावशाली और ताकतवर लोगों का हाथ है जिन्होंने अपनी हनक का दुरुपयोग किया है। उन्होंने एसपी और डीएम के नेतृत्व पर भी सवालिया निशान लगाते हुए कहा कि जिले की जनता इस प्रकार के कृत्यों को कभी माफ नहीं करेगी। दुबे ने स्पष्ट किया कि वंश कश्यप को न्याय दिलाने के लिए यदि उन्हें जेल की सलाखों के पीछे भी जाना पड़े, तो वे खुशी-खुशी इसे स्वीकार करेंगे और अन्याय के खिलाफ अपनी लड़ाई जारी रखेंगे। इस हाई-प्रोफाइल गिरफ्तारी के बाद मैनपुरी में राजनीतिक सरगर्मी अपने चरम पर पहुँच गई है और क्षेत्र में तरह-तरह की चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। एक तरफ जहाँ समर्थक इसे न्याय की आवाज दबाने की एक सोची-समझी साजिश बता रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ पुलिस और प्रशासन की भूमिका संदेह के घेरे में आ गई है। इस घटनाक्रम ने यह साफ कर दिया है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा शांत होने के बजाय और अधिक बड़ा राजनीतिक रूप ले सकता है, जिससे जिले की राजनीति में नए समीकरण बन सकते हैं।
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