मैनपुरी ARTO कार्यालय में अवैध वसूली का आरोप, किसान नेताओं का प्रदर्शन
मैनपुरी ARTO कार्यालय में ड्राइविंग लाइसेंस के नाम पर अवैध वसूली के खिलाफ किसान नेताओं ने प्रदर्शन किया। जानें क्या है पूरा मामला और क्या हैं आरोप।
मैनपुरी कलेक्ट्रेट स्थित एआरटीओ (ARTO) कार्यालय इन दिनों विवादों के घेरे में है। हाल ही में, किसान संगठनों से जुड़े नेताओं ने कार्यालय परिसर में पहुंचकर जमकर हंगामा किया और कथित अवैध वसूली के खिलाफ अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया। इस प्रदर्शन के दौरान कार्यालय की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए गए, जिससे प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है।
प्रदर्शनकारी किसान नेताओं का मुख्य आरोप है कि कार्यालय में तैनात निजी कर्मचारियों द्वारा आम जनता से सुविधा शुल्क के नाम पर अवैध वसूली की जा रही है। नेताओं का दावा है कि बिना अतिरिक्त भुगतान किए किसी भी फाइल का निस्तारण नहीं हो रहा है, जिससे आम नागरिक परेशान हैं। विरोध के दौरान एआरटीओ और आरआई के खिलाफ भी नारेबाजी की गई, जिससे कार्यालय का कामकाज कुछ समय के लिए बाधित रहा।
ड्राइविंग लाइसेंस के नाम पर वसूली का खेल
किसान नेताओं ने विशेष रूप से ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने की प्रक्रिया में हो रही अनियमितताओं को उजागर किया है। उनके आरोपों के अनुसार, एक ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के लिए आवेदकों को निर्धारित सरकारी शुल्क से कहीं अधिक राशि खर्च करनी पड़ रही है। नेताओं का आरोप है कि एक लाइसेंस के लिए लोगों से 7,000 से 7,500 रुपये तक वसूले जा रहे हैं। इसमें से लगभग 5,000 से 6,000 रुपये केवल 'सुविधा शुल्क' के रूप में निजी कंपनियों और बिचौलियों की जेब में जा रहे हैं।
इस संबंध में कुछ मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
- अतिरिक्त शुल्क: सरकारी निर्धारित शुल्क के अलावा भारी भरकम सुविधा शुल्क की मांग।
- निजी कर्मचारियों की भूमिका: कार्यालय में काम करने वाले निजी कर्मियों पर अवैध वसूली के सीधे आरोप।
- पारदर्शिता का अभाव: आवेदकों को प्रक्रिया के बारे में स्पष्ट जानकारी न देकर गुमराह करना।
इस तरह के आरोपों ने विभागीय कार्यप्रणाली की पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्नचिन्ह लगा दिया है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यदि कोई व्यक्ति सीधे कार्यालय पहुंचता है, तो उसे विभिन्न तकनीकी कारणों का हवाला देकर टाल दिया जाता है, जबकि दलालों या निजी माध्यमों से आने वाले आवेदनों का काम तुरंत हो जाता है।
प्रशासनिक जवाबदेही और आगे की राह
सरकारी कार्यालयों में इस प्रकार की कथित वसूली न केवल भ्रष्टाचार को बढ़ावा देती है, बल्कि आम आदमी का सरकारी तंत्र से भरोसा भी कम करती है। किसान नेताओं ने मांग की है कि इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उनका कहना है कि जो भी कर्मचारी या अधिकारी इस अवैध वसूली में संलिप्त हैं, उनके खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
फिलहाल, स्थानीय प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया है। हालांकि, जनता की मांग है कि लाइसेंस प्रक्रिया को पूरी तरह से ऑनलाइन और पारदर्शी बनाया जाए ताकि किसी भी बिचौलिए की आवश्यकता न रहे। जब तक विभाग की ओर से इस मामले में कोई ठोस कदम नहीं उठाया जाता, तब तक इस तरह के विरोध प्रदर्शनों की संभावना बनी रहेगी। यह घटना पूरे जिले में चर्चा का विषय बनी हुई है और अब देखना यह होगा कि उच्चाधिकारी इस पर क्या कार्रवाई करते हैं।
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