ईरान–इज़रायल संघर्ष तेज, पर्यटन स्थलों को लेकर ईरान की चेतावनी से वैश्विक चिंता बढ़ी
ईरान–इज़रायल संघर्ष तेज, पर्यटन स्थलों को लेकर ईरान की चेतावनी से वैश्विक चिंता बढ़ी
ईद के मौके पर बयान, ऊर्जा ठिकानों पर हमलों से तेल बाजार में उथल-पुथल
नई दिल्ली। ईरान और इज़रायल के बीच जारी भीषण संघर्ष ने अब एक नया और चिंताजनक मोड़ ले लिया है। ईरान ने ईद के दिन दुनिया भर के पर्यटन स्थलों, पार्कों और मनोरंजन क्षेत्रों को लेकर कड़ी चेतावनी जारी की है, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुरक्षा और पर्यटन उद्योग को लेकर चिंता बढ़ गई है। ईरान के सैन्य प्रवक्ता अब्दुलफज़ल शेकरची ने शुक्रवार को बयान देते हुए कहा कि अब पारंपरिक युद्धक्षेत्र से बाहर भी उनके दुश्मनों को निशाना बनाया जा सकता है। उन्होंने संकेत दिया कि अमेरिका और इज़रायल से जुड़े लोग अब पर्यटन स्थलों पर भी सुरक्षित नहीं रहेंगे। इस बयान को मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। यह चेतावनी ऐसे समय आई है जब क्षेत्र में ईद-उल-फितर और नवरोज़ जैसे महत्वपूर्ण पर्व मनाए जा रहे हैं, लेकिन युद्ध के चलते उत्सव का माहौल फीका पड़ गया है।
इस बीच, हाल के दिनों में खाड़ी क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है। कुवैत की मिना अल-अहमदी रिफाइनरी पर ड्रोन हमले की खबर सामने आई, जबकि दुबई और सऊदी अरब में भी मिसाइल हमलों की कोशिशें की गईं। कई हमलों को वायु रक्षा प्रणालियों ने विफल कर दिया, लेकिन क्षेत्र में अस्थिरता और भय का माहौल बना हुआ है। विशेषज्ञों के अनुसार, ऊर्जा ढांचे पर हमलों का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया है। होर्मुज़ जलडमरूमध्य, जहां से दुनिया की लगभग 20% तेल आपूर्ति गुजरती है, वहां बढ़ते तनाव से आपूर्ति बाधित होने की आशंका है। ब्रेंट क्रूड की कीमतें 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 110 डॉलर के पार पहुंच चुकी हैं और इसके और बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। दूसरी ओर, अमेरिका और इज़रायल का दावा है कि उन्होंने ईरान की सैन्य क्षमताओं को भारी नुकसान पहुंचाया है। हालांकि, ईरान ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा है कि उसका मिसाइल कार्यक्रम जारी है और हथियार भंडार सुरक्षित है।
संघर्ष का दायरा भी लगातार बढ़ रहा है। इज़रायल ने लेबनान और सीरिया में हमले तेज कर दिए हैं, जबकि ईरान समर्थित समूह जवाबी कार्रवाई कर रहे हैं। अब तक हजारों लोगों की मौत हो चुकी है और लाखों लोग विस्थापित हुए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह संघर्ष जल्द नहीं थमा, तो यह एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध का रूप ले सकता है, जिसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा आपूर्ति और आम नागरिकों की सुरक्षा पर गंभीर रूप से पड़ेगा।
