फर्रुखाबाद: मकान ढहाते समय जीना गिरने से मजदूर की दर्दनाक मौत

फर्रुखाबाद के नवाबगंज में मकान तोड़ते समय जीना गिरने से एक मजदूर की मौत हो गई। 8 बच्चों के सिर से उठा पिता का साया, परिवार में मचा कोहराम।

Nov 01, 2026 - 22:06
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फर्रुखाबाद: मकान ढहाते समय जीना गिरने से मजदूर की दर्दनाक मौत

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फर्रुखाबाद जिले के थाना नवाबगंज अंतर्गत ग्राम पुराना गनीपुर में एक हृदयविदारक घटना सामने आई है, जहां एक निर्माणाधीन मकान को तोड़ने के दौरान जीना (सीढ़ियां) गिरने से 53 वर्षीय मजदूर विष्णु दयाल की दुखद मौत हो गई। इस हादसे ने एक हंसते-खेलते परिवार की खुशियों को पल भर में मातम में बदल दिया है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम मनीपुर निवासी विष्णु दयाल पेशे से एक मेहनती मजदूर थे। रविवार की सुबह वह अपने साथी मजदूरों मनोज और महेंद्र के साथ गांव के ही निवासी नसीम के मकान पर काम करने के लिए पहुंचे थे। मकान को तोड़ने का कार्य चल रहा था। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जब विष्णु दयाल दीवार तोड़ने का प्रयास कर रहे थे, तभी अचानक मकान का भारी-भरकम जीना भरभराकर उनके ऊपर आ गिरा। मलबे के नीचे दबने से विष्णु दयाल गंभीर रूप से घायल हो गए।

हादसे के बाद का घटनाक्रम

घटना के तुरंत बाद मौके पर अफरातफरी का माहौल बन गया। साथ काम कर रहे अन्य मजदूरों और मकान मालिक नसीम ने आनन-फानन में मलबे को हटाया और विष्णु दयाल को बाहर निकाला। उन्हें गंभीर अवस्था में पहले नवाबगंज स्थित स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। प्राथमिक उपचार के बाद चिकित्सकों ने उन्हें लोहिया अस्पताल की इमरजेंसी में रेफर कर दिया। हालांकि, अस्पताल में इलाज के दौरान विष्णु दयाल ने दम तोड़ दिया। अस्पताल प्रशासन ने शव को मोर्चरी में रखवाकर स्थानीय पुलिस को घटना की सूचना दी।

मकान मालिक का पक्ष

इस पूरे मामले पर मकान मालिक नसीम का कहना है कि उन्होंने मजदूर को केवल मकान तोड़ने का निर्देश दिया था, लेकिन जीने की दीवार तोड़ने के लिए नहीं कहा गया था। नसीम के मुताबिक, विष्णु दयाल ने उनकी सलाह को नजरअंदाज करते हुए स्वयं ही जीने की दीवार तोड़ने का प्रयास किया, जिसके परिणामस्वरूप यह अनहोनी घटित हुई।

परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़

विष्णु दयाल की मौत की खबर जैसे ही उनके गांव पहुंची, पूरे परिवार में कोहराम मच गया। विष्णु दयाल अपने पीछे आठ बच्चों का भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं। उनकी सबसे बड़ी बेटी का विवाह हो चुका है, लेकिन शेष सात बच्चों और पत्नी गिरिजा देवी की पूरी जिम्मेदारी उन्हीं के कंधों पर थी। परिवार की आजीविका पूरी तरह से विष्णु दयाल की दैनिक मजदूरी पर ही टिकी थी। उनकी असामयिक मृत्यु ने न केवल परिवार के मुखिया को छीन लिया है, बल्कि बच्चों के भविष्य पर भी एक गहरा आर्थिक संकट खड़ा कर दिया है।

स्थानीय लोग और ग्रामीण इस दुखद घड़ी में पीड़ित परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त कर रहे हैं। प्रशासन द्वारा मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच की जा रही है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि सुरक्षा मानकों में कहां चूक हुई। यह हादसा निर्माण कार्यों के दौरान बरती जाने वाली सुरक्षा सावधानियों की महत्ता को भी रेखांकित करता है, क्योंकि एक छोटी सी चूक ने एक परिवार को बेसहारा कर दिया है।

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SuragBureau

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