आशा कार्यकर्ताओं की 11 सूत्रीय मांगें: सरकारी कर्मचारी का दर्जा दिलाने की मुहिम
एटा में आशा कार्यकर्ताओं ने 11 सूत्रीय मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। न्यूनतम वेतन और सरकारी कर्मचारी का दर्जा देने की प्रमुख मांगें शामिल हैं।
एटा जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ मानी जाने वाली आशा एवं आशा संगिनी कार्यकर्ताओं ने अपनी विभिन्न समस्याओं और लंबित मांगों को लेकर मोर्चा खोल दिया है। ‘आपकी आवाज सामाजिक संगठन’ के बैनर तले इन कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री को संबोधित एक ज्ञापन सौंपा है, जिसमें उनके द्वारा 11 सूत्रीय मांगों पर जोर दिया गया है। इन मांगों में सबसे प्रमुख मांग आशा कार्यकर्ताओं को 'सरकारी कर्मचारी' का दर्जा प्रदान करना है।
स्वास्थ्य सेवाओं में आशा कार्यकर्ताओं का महत्व
ग्रामीण अंचल में स्वास्थ्य विभाग की योजनाओं को धरातल पर उतारने में आशा कार्यकर्ताओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं से लेकर टीकाकरण और कुपोषण दूर करने जैसे अभियानों में ये महिलाएं अग्रिम पंक्ति में कार्य करती हैं। बावजूद इसके, लंबे समय से इन्हें उचित मानदेय और सुविधाओं के अभाव का सामना करना पड़ रहा है। ज्ञापन में इस बात पर चिंता व्यक्त की गई कि इतनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के बावजूद उन्हें सरकारी कर्मचारी के रूप में मान्यता नहीं दी जा रही है।
प्रमुख 11 सूत्रीय मांगें
संगठन द्वारा रखी गई मांगों की सूची काफी विस्तृत है, जो इन कार्यकर्ताओं के आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी है। प्रमुख मांगों में शामिल हैं:
- आशा एवं आशा संगिनी को सरकारी कर्मचारी घोषित किया जाए।
- नियुक्ति की तिथि से 18 हजार रुपये प्रतिमाह न्यूनतम वेतन सुनिश्चित हो।
- कार्यस्थल पर यात्रा भत्ता और आकस्मिक मृत्यु होने पर 20 लाख रुपये की आर्थिक सहायता का प्रावधान।
- मृतक कार्यकर्ताओं के आश्रितों को सरकारी नौकरी दी जाए।
- कार्यक्षेत्र का निर्धारण और 24 दिन के बजाय 30 दिन का कार्य सुनिश्चित करना।
- पीएफ की सुविधा और प्रतिदिन एक हजार रुपये का भुगतान।
- सेवानिवृत्ति की आयु 60 वर्ष निर्धारित करना।
- सभी कार्यकर्ताओं के लिए आयुष्मान कार्ड की सुविधा।
प्रशासन और संगठन का रुख
इस प्रदर्शन के दौरान स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी भी उपस्थित रहे, जिनमें अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. आरएम तिवारी, सुधीर मोहन और मलेरिया प्रभारी अधिकारी लोकमन सिंह शामिल थे। ज्ञापन पर संगठन की मंडल अध्यक्ष सुषमा चतुर्वेदी और प्रदेश अध्यक्ष पुष्पा देवी के हस्ताक्षर हैं। संगठन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि यदि सरकार जल्द ही इन मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लेती है, तो कार्यकर्ता कार्य बहिष्कार करने के लिए विवश होंगे।
इस ज्ञापन की प्रतियां केंद्र और राज्य सरकार के संबंधित मंत्रियों के साथ-साथ एटा के मुख्य चिकित्साधिकारी को भी भेजी गई हैं ताकि मामले की गंभीरता को समझते हुए उचित कार्रवाई की जा सके। यह आंदोलन न केवल एटा बल्कि पूरे प्रदेश में आशा कार्यकर्ताओं के बीच चल रही बेचैनी को दर्शाता है। उम्मीद की जा रही है कि प्रशासन जल्द ही इस मामले में वार्ता का रास्ता खोलेगा ताकि स्वास्थ्य सेवाओं पर किसी भी प्रकार का प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Wow
0
Sad
0
Angry
0
Comments (0)