मैनपुरी: नाबालिग से दुष्कर्म मामले में दोषी को आजीवन कारावास की सजा
मैनपुरी में नाबालिग से दुष्कर्म के दोषी अखिलेश को कोर्ट ने सुनाई आजीवन कारावास और एक लाख रुपये जुर्माने की सजा। जानिए मामले का पूरा विवरण।
मैनपुरी जिले के थाना भौगांव क्षेत्र में एक नाबालिग बालिका के साथ हुए जघन्य अपराध ने समाज को झकझोर कर रख दिया था। इस मामले में माननीय न्यायालय ने न्याय की नजीर पेश करते हुए दोषी को कठोर आजीवन कारावास और भारी अर्थदंड की सजा सुनाई है। यह फैसला न केवल पीड़िता को न्याय दिलाने की दिशा में एक बड़ा कदम है, बल्कि अपराधियों के लिए एक कड़ा संदेश भी है कि कानून के हाथ लंबे हैं।
घटना की पृष्ठभूमि और कानूनी कार्रवाई
घटना 8 जुलाई 2023 की है, जब थाना भौगांव क्षेत्र की एक नाबालिग बालिका अपने घर के पास स्थित निर्माणाधीन मकान में गई थी। उसी दौरान आरोपी अखिलेश उर्फ टेशन, जो कि मोहल्ला चौधरी, कस्बा व थाना भौगांव का निवासी है, ने बालिका को अकेला पाकर उसके साथ दुष्कर्म जैसी घिनौनी वारदात को अंजाम दिया। घटना के बाद पीड़िता के परिजनों ने तत्काल पुलिस को सूचना दी, जिसके आधार पर थाना भौगांव में मुकदमा अपराध संख्या 480/2023 पंजीकृत किया गया। पुलिस ने मामले की संवेदनशीलता को समझते हुए तुरंत विवेचना शुरू की और आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। पुलिस ने अपनी जांच के दौरान भारतीय दंड संहिता (भादवि) की धारा 376एबी, पॉक्सो अधिनियम की धारा 5एम/6 तथा एससी/एसटी एक्ट की धारा 3(2)5 के तहत आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया।
न्यायालय का कड़ा फैसला
मामले की सुनवाई जनपद मैनपुरी की स्पेशल जज पॉक्सो कोर्ट में चली। अभियोजन पक्ष की ओर से रखे गए ठोस साक्ष्यों और गवाहों के बयानों ने आरोपी के अपराध को पूरी तरह सिद्ध कर दिया। अदालत ने पत्रावलियों पर उपलब्ध सभी वैज्ञानिक साक्ष्यों और विवेचक द्वारा संकलित पुख्ता सबूतों का बारीकी से अवलोकन किया। अंततः, न्यायालय ने आरोपी अखिलेश को दोषी करार देते हुए उसे पॉक्सो अधिनियम की धारा 5एम/6 के तहत कठोर आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इसके अतिरिक्त, आरोपी पर एक लाख रुपये का अर्थदंड भी अधिरोपित किया गया है, जो पीड़िता के पुनर्वास और न्याय सुनिश्चित करने में सहायक होगा।
प्रशासनिक और कानूनी टीम का सराहनीय कार्य
इस केस में सजा सुनिश्चित कराना अभियोजन पक्ष और पुलिस विभाग के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। मामले की सुनवाई के दौरान एडीजीसी शैलेन्द्र्री राजपूत ने प्रभावी पैरवी की, जिससे आरोपी को सजा तक पहुँचाना संभव हो सका। इसके साथ ही, विवेचक सीओ सुनील कुमार की निष्पक्ष जांच, कोर्ट मोहर्रिर हे०कां० राहुल पाठक और कोर्ट पैरोकार हे०कां० प्रदीप कुमार की तत्परता ने भी इस केस को मजबूत आधार प्रदान किया। साथ ही, प्रभारी मॉनिटरिंग सेल, मैनपुरी का भी इस मामले में विशेष योगदान रहा।
निष्कर्ष
यह फैसला स्पष्ट करता है कि नाबालिगों के प्रति होने वाले अपराधों में न्यायालय और प्रशासन पूरी तरह से सजग हैं। समाज में भयमुक्त वातावरण बनाने के लिए इस प्रकार के कठोर दंड अत्यंत आवश्यक हैं। मैनपुरी पुलिस और न्यायपालिका की इस संयुक्त पहल ने आम नागरिकों का कानून व्यवस्था पर भरोसा और अधिक मजबूत किया है। यह निर्णय उन सभी के लिए एक चेतावनी है जो महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करने का प्रयास करते हैं।
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