सीपी इंटरनेशनल स्कूल में मना ग्रैंडपेरेंट्स डे और दशहरा, बच्चों ने बिखेरे संस्कार
फर्रुखाबाद के सीपी इंटरनेशनल स्कूल में ग्रैंडपेरेंट्स डे और दशहरा पर बच्चों ने रामलीला और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से भारतीय संस्कृति की झलक पेश की।
फर्रुखाबाद के सीपी इंटरनेशनल स्कूल में हाल ही में ग्रैंडपेरेंट्स डे और दशहरा का भव्य आयोजन किया गया, जिसमें न केवल मनोरंजन हुआ बल्कि भारतीय संस्कारों की अनूठी मिसाल भी देखने को मिली। कार्यक्रम की शुरुआत बच्चों के उत्साह और दादा-दादी के सम्मान के साथ हुई, जिसने पूरे विद्यालय परिसर को भक्तिमय वातावरण में बदल दिया।
कार्यक्रम में नन्हे कलाकारों ने अपनी प्रतिभा का अद्भुत प्रदर्शन किया। बच्चों ने पुराने दौर के सदाबहार गीतों पर शानदार प्रस्तुतियां देकर उपस्थित दादा-दादी और अभिभावकों की पुरानी यादें ताजा कर दीं। बच्चों का यह प्रयास न केवल सराहनीय था, बल्कि इसने पीढ़ियों के बीच के फासले को कम करने का काम भी किया। वहीं, रामलीला का मंचन इस आयोजन का मुख्य आकर्षण रहा। भगवान श्रीराम के जन्म से लेकर राज्याभिषेक तक की पूरी गाथा को बच्चों ने अपने अभिनय के माध्यम से जीवंत कर दिया। नन्हे कलाकारों के संवाद और उनकी वेशभूषा ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
डिजिटल युग में संस्कारों का महत्व
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने एक महत्वपूर्ण मुद्दे पर प्रकाश डाला कि कैसे आज की डिजिटल दुनिया में बच्चे मोबाइल स्क्रीन तक सीमित होकर रह गए हैं। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे बच्चों को मोबाइल की दुनिया से बाहर निकालें और उन्हें रामायण, महाभारत तथा पंचतंत्र की कहानियां सुनाएं। यह कहानियां केवल मनोरंजन का साधन नहीं हैं, बल्कि ये बच्चों में नैतिक मूल्यों, बड़ों के प्रति सम्मान और सही-गलत के बीच के अंतर को समझने की दृष्टि पैदा करती हैं।
दादा-दादी का बच्चों के जीवन में होना एक बड़े वरदान के समान है। वे बच्चों के लिए अनुभवों का खजाना होते हैं। जब बच्चे अपने बुजुर्गों के साथ समय बिताते हैं, तो उन्हें जीवन के वे सबक सीखने को मिलते हैं जो किताबी शिक्षा या मोबाइल के वीडियो से नहीं मिल सकते। यह भावनात्मक जुड़ाव बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण में एक मजबूत नींव का काम करता है।
सांस्कृतिक मूल्यों का संरक्षण
रामलीला के मंचन ने यह संदेश दिया कि मर्यादा, कर्तव्य और आदर्श आज भी हमारे जीवन के अभिन्न अंग हैं। बच्चों ने जिस तरह से विभिन्न पात्रों को निभाया, उससे स्पष्ट था कि वे हमारी संस्कृति को आत्मसात कर रहे हैं। विद्यालय प्रबंधन ने इस बात पर जोर दिया कि शिक्षा के साथ-साथ संस्कारों का संचार करना विद्यालय का प्राथमिक कर्तव्य है।
इस भव्य आयोजन में विद्यालय की डिप्टी डायरेक्टर डॉ. मिथिलेश अग्रवाल, अंजू राजे एवं प्रिंसिपल पी. रथ ने उपस्थित सभी दादा-दादी एवं अभिभावकों का स्वागत किया। उन्होंने बच्चों की प्रस्तुतियों की भूरि-भूरि प्रशंसा की और कहा कि ऐसे कार्यक्रमों से बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ता है। विद्यालय के सभी शिक्षकों ने भी इस आयोजन को सफल बनाने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया।
अंत में, यह कार्यक्रम केवल एक स्कूली गतिविधि बनकर नहीं रहा, बल्कि इसने समाज को यह संदेश दिया कि यदि हम अपनी आने वाली पीढ़ी को एक जिम्मेदार नागरिक बनाना चाहते हैं, तो उन्हें अपनी जड़ों और परंपराओं से जोड़ना अनिवार्य है। सीपी इंटरनेशनल स्कूल का यह प्रयास सराहनीय है कि उन्होंने तकनीक के इस दौर में बच्चों को भारतीय संस्कृति की महत्ता से परिचित कराया।
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