संकिसा बौद्ध महोत्सव: श्रद्धालुओं की भारी भीड़ और भव्य आयोजन
फर्रुखाबाद के संकिसा में दो दिवसीय बौद्ध महोत्सव का भव्य शुभारंभ। श्रीलंका समेत कई देशों के श्रद्धालु पहुंचे, सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम।
शरद पूर्णिमा के पावन अवसर पर ऐतिहासिक बौद्ध नगरी संकिसा में दो दिवसीय बौद्ध महोत्सव का भव्य आयोजन शुरू हो गया है। यह स्थान न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि बौद्ध अनुयायियों के लिए एक महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल भी माना जाता है। अमृतपुर विधायक सुशील शाक्य ने रविवार की शाम तीन बजे दीप प्रज्वलित कर इस महोत्सव का औपचारिक उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए संकिसा के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व पर प्रकाश डाला।
धार्मिक उत्साह और अंतरराष्ट्रीय उपस्थिति
महोत्सव के पहले दिन से ही संकिसा के मुख्य स्तूप स्थल पर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। श्रीलंका से आए बौद्ध अनुयायियों की उपस्थिति ने इस कार्यक्रम को अंतरराष्ट्रीय स्वरूप प्रदान किया। इसके अलावा, दिल्ली, कानपुर, आगरा, बरेली, मैनपुरी, फिरोजाबाद और हरदोई जैसे विभिन्न जिलों से आए हजारों श्रद्धालुओं ने स्तूप की परिक्रमा की और मोमबत्तियां जलाकर विश्व शांति की कामना की। संकिसा स्थित जापानी और म्यांमार के बौद्ध मंदिरों में भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखी गई, जहां बौद्ध भिक्षुओं द्वारा दिए गए प्रवचनों ने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक और शांत बना दिया।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम
प्रशासन ने इस बड़े आयोजन को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था के व्यापक इंतजाम किए हैं। महोत्सव स्थल पर कुल 250 पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है, जिसमें 150 कांस्टेबल और 100 हेड कांस्टेबल, उप-निरीक्षक और निरीक्षक स्तर के अधिकारी शामिल हैं। सुरक्षा की दृष्टि से पूरे परिसर को सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में रखा गया है।
- बैरिकेडिंग: स्तूप के चारों ओर सुरक्षा घेरा सुनिश्चित किया गया है।
- यातायात प्रबंधन: कार्यक्रम स्थल से 100 मीटर पहले ही भारी वाहनों और चार पहिया वाहनों को रोक दिया गया है ताकि भीड़भाड़ न हो।
- निरीक्षण: एडीएम प्रशासन अरुण कुमार सिंह और एएसपी गिरीश कुमार सिंह ने स्वयं मौके पर पहुंचकर तैयारियों का जायजा लिया।
एडीएम अरुण कुमार सिंह ने बताया कि महोत्सव में शामिल होने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। उन्होंने कहा, 'दूसरे राज्यों और जिलों से आने वाले अनुयायियों को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिए गए हैं।'
सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व
संकिसा का इतिहास भगवान बुद्ध के स्वर्गारोहण से जुड़ा माना जाता है, जिसके कारण यह स्थान पूरी दुनिया के बौद्ध अनुयायियों के लिए अत्यंत पवित्र है। महोत्सव के दौरान आयोजित की जा रही विभिन्न धार्मिक गतिविधियां न केवल स्थानीय संस्कृति को बढ़ावा देती हैं, बल्कि पर्यटन की दृष्टि से भी इस क्षेत्र को एक नई पहचान दिलाती हैं। महोत्सव के दूसरे दिन भी विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों और बौद्ध संगोष्ठियों का आयोजन किया जाएगा, जिसमें देश भर के विद्वान और भिक्षु अपने विचार साझा करेंगे। प्रशासन और स्थानीय आयोजकों को उम्मीद है कि इस वर्ष श्रद्धालुओं की संख्या पिछले वर्षों के मुकाबले अधिक होगी, जो इस महोत्सव की बढ़ती लोकप्रियता का प्रमाण है।
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