मैनपुरी: डीएम डॉ. इंद्रमणि त्रिपाठी ने खेत में उतरकर की धान की क्रॉप कटिंग
मैनपुरी के जिलाधिकारी डॉ. इंद्रमणि त्रिपाठी ने नगला पीपल गांव में धान की क्रॉप कटिंग का निरीक्षण किया और किसानों से सीधा संवाद कर समस्याओं को जाना।
मैनपुरी जनपद में कृषि विभाग की कार्यप्रणाली को जमीनी स्तर पर परखने के उद्देश्य से जिलाधिकारी डॉ. इंद्रमणि त्रिपाठी ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। सदर तहसील के ग्राम धारऊ के मजरा नगला पीपल में गाटा संख्या-4 में आयोजित धान की क्रॉप कटिंग प्रक्रिया के दौरान जिलाधिकारी की सक्रिय भागीदारी चर्चा का विषय बनी रही। फसल कटाई के आंकड़ों की सटीकता सुनिश्चित करने के लिए उन्होंने न केवल निरीक्षण किया, बल्कि स्वयं खेत में उतरकर धान की फसल की कटाई भी की।
क्रॉप कटिंग का महत्व और प्रशासनिक सक्रियता
कृषि विभाग द्वारा आयोजित क्रॉप कटिंग का मुख्य उद्देश्य किसी क्षेत्र विशेष में प्रति हेक्टेयर धान की औसत पैदावार का सटीक आकलन करना है। यह प्रक्रिया सरकारी नीतियों, फसल बीमा दावों और भविष्य की कृषि योजनाओं के निर्धारण में आधारशिला का कार्य करती है। जिलाधिकारी का स्वयं मौके पर पहुंचकर इस प्रक्रिया का जायजा लेना यह दर्शाता है कि प्रशासन कृषि सांख्यिकी के आंकड़ों की पारदर्शिता के प्रति कितना गंभीर है।
खेत में फसल काटते हुए जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि फसल कटाई के दौरान मापदंडों का पूरी तरह पालन किया जाए ताकि सरकारी आंकड़ों में कोई त्रुटि न रहे। उन्होंने कहा कि कृषि उत्पादन का सही आकलन ही किसानों को उनकी मेहनत का उचित प्रतिफल दिलाने में सहायक सिद्ध होता है।
किसानों के साथ सीधा संवाद
निरीक्षण के दौरान डॉ. इंद्रमणि त्रिपाठी ने स्थानीय किसानों के साथ खुलकर चर्चा की। इस संवाद में खेती की लागत, बीज की उपलब्धता, खाद की आपूर्ति और धान की कटाई में आने वाली चुनौतियों पर विस्तृत विचार-विमर्श हुआ। किसानों ने अपनी समस्याओं से जिलाधिकारी को अवगत कराया, जिस पर उन्होंने सकारात्मक रुख अपनाते हुए समाधान का आश्वासन दिया।
जिलाधिकारी ने किसानों से निम्नलिखित बिंदुओं पर विशेष चर्चा की:
- कृषि लागत: खेती में होने वाले खर्च और मुनाफे का संतुलन।
- सरकारी योजनाएं: विभिन्न सरकारी कृषि योजनाओं का लाभ उन तक पहुँचने की स्थिति।
- फसल उत्पादन: इस वर्ष मौसम की परिस्थितियों के अनुरूप धान की पैदावार का अनुमान।
- समस्या निवारण: सिंचाई और खाद वितरण से जुड़ी जमीनी मुश्किलें।
किसानों का कहना है कि उच्चाधिकारियों के इस प्रकार के दौरे से न केवल प्रशासनिक कार्यकुशलता बढ़ती है, बल्कि किसानों का मनोबल भी ऊँचा होता है। जब कोई वरिष्ठ अधिकारी स्वयं खेत में उतरकर उनकी समस्याओं को सुनता है, तो सरकारी तंत्र के प्रति विश्वास और अधिक मजबूत होता है।
निष्कर्ष
मैनपुरी प्रशासन का यह प्रयास कृषि क्षेत्र में सुधार की दिशा में एक सकारात्मक कदम है। क्रॉप कटिंग की प्रक्रिया केवल आंकड़ों का खेल नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर किसान की आजीविका से जुड़ी है। जिलाधिकारी डॉ. इंद्रमणि त्रिपाठी द्वारा व्यक्तिगत रूप से इस कार्य की निगरानी करना न केवल कार्य के प्रति उनकी निष्ठा को दर्शाता है, बल्कि यह भी सुनिश्चित करता है कि जिले की कृषि रिपोर्ट पूरी तरह से वास्तविक और विश्वसनीय हो। आने वाले समय में इस तरह की सक्रियता से जिले के किसानों को कृषि संबंधी सरकारी सुविधाओं का लाभ बेहतर ढंग से मिल सकेगा।
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