कायमगंज: मानदेय वृद्धि के लिए आशा कार्यकर्ताओं का 15 दिवसीय कार्य बहिष्कार
कायमगंज में आशा कार्यकर्ताओं ने मानदेय में सम्मानजनक वृद्धि की मांग को लेकर 1 से 15 अक्टूबर तक कार्य बहिष्कार और 5 अक्टूबर को प्रदर्शन का ऐलान किया है।
कायमगंज स्वास्थ्य केंद्र के अंतर्गत कार्यरत आशा एवं आशा संगिनी कार्यकर्ताओं ने अपनी लंबित मांगों को लेकर प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। लंबे समय से मानदेय में सम्मानजनक वृद्धि की बाट जोह रहीं इन कार्यकर्ताओं ने अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। अपनी मांगों को पुरजोर तरीके से रखने के लिए कार्यकर्ताओं ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) अधीक्षक को एक ज्ञापन सौंपा है, जिसमें साफ तौर पर कहा गया है कि यदि समय रहते उनकी मांगों पर विचार नहीं किया गया, तो वे अपने काम से पूरी तरह किनारा कर लेंगी।
आंदोलन की पृष्ठभूमि और कारण
आशा कार्यकर्ताओं का कहना है कि वे स्वास्थ्य विभाग की रीढ़ हैं, जो जमीनी स्तर पर सरकारी योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने का कार्य निष्ठापूर्वक कर रही हैं। चाहे टीकाकरण हो, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य हो या फिर अन्य राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की योजनाएं, आशा कार्यकर्ताओं की भागीदारी अनिवार्य होती है। हालांकि, इन जिम्मेदारियों के बोझ के सामने उन्हें मिलने वाला वर्तमान मानदेय अत्यंत कम है। बढ़ती महंगाई और कार्य के दबाव को देखते हुए, कार्यकर्ताओं का तर्क है कि वर्तमान भुगतान उनके जीवन यापन के लिए अपर्याप्त है।
कार्य बहिष्कार का निर्णय और आगामी रणनीति
ज्ञापन में कार्यकर्ताओं ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि मानदेय में वृद्धि को लेकर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया जाता है, तो वे एक अक्टूबर से 15 अक्टूबर 2026 तक पूर्ण रूप से कार्य बहिष्कार करेंगी। इस दौरान वे विभागीय कार्यों से पूरी तरह दूर रहेंगी, जिसका सीधा असर स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ सकता है। इसके अलावा, आंदोलन को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए उन्होंने पांच अक्टूबर को धरना-प्रदर्शन करने का भी निर्णय लिया है।
- कार्य बहिष्कार की अवधि: एक अक्टूबर से 15 अक्टूबर तक।
- विरोध प्रदर्शन: पांच अक्टूबर को सामूहिक धरना।
- मुख्य मांग: मानदेय में सम्मानजनक और उचित वृद्धि।
कार्यकर्ताओं ने अपने संदेश में कहा है कि वे अपनी ड्यूटी पूरी जिम्मेदारी से निभाना चाहती हैं, लेकिन जब उनके अस्तित्व पर ही संकट हो, तो वे चुप नहीं बैठ सकतीं। उन्होंने उच्च अधिकारियों से अपील की है कि उनकी समस्याओं को गंभीरता से लिया जाए और जल्द से जल्द इस दिशा में कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
स्वास्थ्य सेवाओं पर संभावित प्रभाव
आशा कार्यकर्ताओं के इस निर्णय से ग्रामीण अंचलों में स्वास्थ्य सेवाओं के बाधित होने की पूरी संभावना है। चूँकि आशा कार्यकर्ता ही वह कड़ी हैं जो अस्पताल और ग्रामीण मरीजों के बीच सेतु का काम करती हैं, इसलिए उनके कार्य बहिष्कार से सरकारी योजनाओं की पहुंच प्रभावित हो सकती है। प्रशासन के लिए अब यह एक बड़ी चुनौती है कि वह किस प्रकार समय रहते इस गतिरोध को समाप्त करे।
अंत में, आशा कार्यकर्ताओं ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि उनकी मांगों को इस अवधि के दौरान भी अनसुना किया गया, तो वे अपने आंदोलन को और अधिक उग्र करने के लिए मजबूर होंगी। फिलहाल, क्षेत्र में यह आंदोलन चर्चा का विषय बना हुआ है और सभी की नजरें विभाग के आगामी रुख पर टिकी हैं।
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